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Sunday, May 30, 2010

चन्द्रिका जटाओं में, पर, सज बैठी

वो इक रात का प्रेम
जो तुमसे कर बैठी
चन्द्रिका, बदली,
अँधियारा सब बन बैठी

धुंध जो सवेरा लाया
ऊष्मा से गहरा कर बैठी
द्वंद्व में जो फंसा मनपंछी
अनजाने पिंजरे जा बैठी

दोष नहीं है मेरा भी
जो तुमसे नेह कर बैठी
शिव का ज्ञान पाने को
उन चरणों में जो जा बैठी

चांदनी से अलंकृत हो
लहरों में जो डूब बैठी
भीगा भाव लिए जो निकली
मन आलिंगन में जा बैठी

तुमसे छिपाए सिहरन अपनी
चन्द्रिका बदली में जा बैठी
किया अलविदा अब तुमने योगी
पलकों में आंसू भी छुपा बैठी

तुमको तो ज्ञात ही नहीं
इक जीवन तुम संग जी बैठी
चली हूँ दूर तुमसे ओ जोगी
गंगा सम मैं बह जो बैठी

शिव हो दूर रमते हो, अब तुम
चन्द्रिका जटाओं में, पर, सज बैठी
2:55am, 13/4/10

2 comments:

  1. वो इक रात का प्रेम
    जो तुमसे कर बैठी
    चन्द्रिका, बदली,
    अँधियारा सब बन बैठी.....bhut sundar ,,,,

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  2. TAN BHI SUNDAR MAN BHI SUNDAR SUNDAR H ABHIRAM SUNDARTA KI MURAT TU H SUNDAR TERA NAM SUNDAR THHAL H SUNDAR JAL H SUNDAR AASMAN SUNDAR RAJANI SUNDAR TARE SUNDAR H YE CHAND SUNDAR DUKH H SUNDAR SUKH H SUNDAR YE MUSKAN SUNDER TERI YE ABHIBYKTI CLTI RHE ABIRAM.

    HEMENDRA

    ReplyDelete

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